Archive for the ‘Hindi Articles’ Category

मेरा दिल जो मेरा होता….गीता जी की आवाज़ और गुलज़ार के शब्द, जैसे कविता में घुल जाए अमृत

Friday, December 4th, 2009

Tanuja

गीता दत्त जी के गाए गीतों को सुनते हुए आज हम आ पहुँचे हैं इस ख़ास लघु शृंखला ‘गीतांजली’ की अंतिम कड़ी पर। गीता दत्त डोट कोम के सहयोग से इस पूरे शृंखला में आप ने ना केवल गीता जी के गाए अलग अलग अभिनेत्रियों पर फ़िल्माए हुए गीत सुनें, बल्कि उन अभिनेत्रियों और उन गीतों से संबंधित तमाम जानकारियों से भी अवगत हो सके। अब तक प्रसारित सभी गीत ५० के दशक के थे, लेकिन आज इस शृंखला का समापन हो रहा है ७० के दशक के उस फ़िल्म के गीत से जिसमें गीता जी की आवाज़ आख़िरी बार सुनाई दी थी। यह गीत है १९७१ की फ़िल्म ‘अनुभव’ का, “मेरा दिल जो मेरा होता”। और यह गीत फ़िल्माया गया था तनुजा पर। इस फ़िल्म के गीतों पर और चर्चा आगे बढ़ाने से पहले आइए कुछ बातें तनुजा जी की हो जाए! तनुजा का जन्म बम्बई के एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता कुमारसेन समर्थ एक कवि थे और माँ शोभना समर्थ ३० और ४० के दशकों की एक मशहूर फ़िल्म अभिनेत्री। जहाँ शोभना जी ने अपनी बेटी नूतन को लौंच किया १९५० की फ़िल्म ‘हमारी बेटी’ में, ठीक वैसे ही उन्होने अपनी छोटी बेटी तनुजा को बतौर बाल कलाकार कास्ट किया था उसी फ़िल्म में। उसके बाद तनुजा को पढ़ाई लिखाई के लिए विदेश भेजा गया जहाँ पर उन्होने अंग्रेज़ी, फ़्रेंच और जर्मन भाषाओं की तालीम प्राप्त की। वापस आकर १९६० की फ़िल्म ‘छबिली’ में अपनी बड़ी बहन नूतन के साथ उन्होने अभिनय किया, जिसका निर्देशन उनकी माँ ने ही किया था। इस फ़िल्म में गीता दत्त ने नूतन के साथ अपना एक्लौता डुएट गाया था। इसके एक दशक बाद बासु भट्टाचार्य की फ़िल्म ‘अनुभव’ में तनुजा का किरदार बहुत सराहा गया। तनुजा ने इस फ़िल्म की शूटिंग् के लिए अपना अपार्टमेंट बासु दा को दे रखा था, जिसके बदले बासु दा ने उन्हे दी एक यादगार भूमिका।

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मुझको तुम जो मिले ये जहान मिल गया…जिस अभिनेत्री को मिली गीता की सुरीली आवाज़, वो यही गाती नज़र आई

Thursday, December 3rd, 2009

Mala Sinha

“गीतांजली” की नौवी कड़ी में आज गीता दत्त की आवाज़ सजने वाली है माला सिंहा पर। दोस्तों, हमने इस महफ़िल में माला सिंहा पर फ़िल्माए कई गीत सुनवा चुके हैं लेकिन कभी भी हमने उनकी चर्चा नहीं की। तो आज हो जाए? माला सिंहा का जन्म एक नेपाली इसाई परिवार में हुआ था। उनका नाम रखा गया आल्डा। लेकिन स्कूल में उनके सहपाठी उन्हे डाल्डा कहकर छेड़ने की वजह से उन्होने अपना नाम बदल कर माला रख लिया। कलकत्ते में कुछ बंगला फ़िल्मों में अभिनय करने के बाद माला सिंहा को किसी बंगला फ़िल्म की शूटिंग् के लिए बम्बई जाना पड़ा। वहाँ उनकी मुलाक़ात हुई थी गीता दत्त से। गीता दत्त को माला सिंहा बहुत पसंद आई और उन्होने उनकी किदार शर्मा से मुलाक़ात करवा दी। और शर्मा जी ने ही माला सिंहा को बतौर नायिका अपनी फ़िल्म ‘रंगीन रातें’ में कास्ट कर दी। लेकिन माला की पहली हिंदी फ़िल्म थी ‘बादशाह’ जिसमें उनके नायक थे प्रदीप कुमार। उसके बाद आई पौराणिक धार्मिक फ़िल्म ‘एकादशी’। दोनों ही फ़िल्में फ़्लॊप रही और उसके बाद किशोर साहू की फ़िल्म ‘हैमलेट’ ने माला को दिलाई ख्याति, भले ही फ़िल्म पिट गई थी। १९५७ में गुरु दत्त ने माला को अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म ‘प्यासा’ में एक महत्वपूर्ण किरदार निभाने का मौका दिया जिसे वो पहले मधुबाला को देना चाहते थे। माला ने उस किरदार में जान डाल दी। यह फ़िल्म ना केवल हिंदी सिनेमा की एक क्लासिक फ़िल्म है, बल्कि यह फ़िल्म माला सिंहा के करीयर की एक टर्निंग् पॊयन्ट भी सिद्ध हुई। इसके बाद माला सिंहा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। धूल का फूल, परवरिश, फिर सुबह होगी, मैं नशे में हूँ, लव मैरिज, बहूरानी, अनपढ़, आसरा, दिल तेरा दीवाना, गुमराह, आँखें, हरियाली और रास्ता, हिमालय की गोद में, जैसी सुपर डुपर हिट फ़िल्में माला की झोली में गई।

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चंदा चांदनी में जब चमके…गीता दत्त और गीता बाली का अनूठा संगम

Thursday, December 3rd, 2009

Geeta Bali

हमारे चुने हुए गीता दत्त के गाए गानें इन दिनों आप सुन रहे हैं ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की ख़ास लघु शृंखला ‘गीतांजली’ के अन्तर्गत। आज के अंक में गीता दत्त गा रहीं हैं गीता बाली के लिए। जी हाँ, वही गीता बाली जिनकी थिरकती हुई आँखें, जिनके चेहरे के अनगिनत भाव, जिनकी नैचरल अदाकारी के चर्चे आज भी लोग करते हैं। और इन सब से परे यह कि वो एक बहुत अच्छी इंसान थीं। गीता बाली का जन्म अविभाजित पंजाब में एक सिख परिवार में हुआ था। उनका असली नाम था हरकीर्तन कौर। देश के बँटवारे के बाद परिवार बम्बई चली आई और गरीबी ने उन्हे घेर लिया। तभी हरकीर्तन कौर बन गईं गीता बाली और अपने परिवार को आर्थिक संकट से उबारा एक के बाद एक फ़िल्म में अभिनय कर। बम्बई आने से पहले उन्होने पंजाब की कुछ फ़िल्मों में नृत्यांगना के छोटे मोटे रोल किए हुए थे। कहा जाता है कि जब किदार शर्मा, जिन्होने गीता बाली को पहला ब्रेक दिया, पहली बार जब वो उनसे मिले तो वो अपने परिवार के साथ किसी के बाथरूम में रहा करती थीं। किदार शर्मा ने पहली बार गीता बाली को मौका दिया १९४८ की फ़िल्म ‘सुहाग रात’ में। और इसी फ़िल्म से शुरु हुआ गीता बाली और गीता रॉय का साथ। गीता बाली और गीता दत्त, दोनों ने ही यह साबित किया कि दर्दीले और चुलबुले, दोनों तरह के किरदार और गीत गानें में वो अपनी अपनी जगह पारंगत हैं। १९५१ में गुरु दत्त की पहली हिट फ़िल्म ‘बाज़ी’ से गीता बाली एक नामचीन अदाकारा बन गईं। देव आनंद ने इस फ़िल्म के बारे में कहा था कि “People came repeatedly to theatres to see Geeta’s spirited dancing to “tadbeer se bigdi hui taqdeer bana de”. This cemented the bonding between Geeta Bali and Geeta Roy!” शम्मी कपूर गीता बाली की ज़िंदगी में आए जब वे दोनों ‘मिस कोका कोला’ और ‘कॊफ़ी हाउस’ जैसी फ़िल्मों में साथ साथ काम कर रहे थे। दोनों ने आगे चलकर शादी कर ली, लेकिन बहुत जल्द गीता बाली इस दुनिया से गुज़र गईं। उस वक़्त शम्मी कपूर ‘तीसरी मंज़िल’ फ़िल्म में काम कर रहे थे।

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किया यह क्या तूने इशारा जी अभी अभी…गीत दत्त के स्वरों में हेलन ने बिखेरा था अपना मदमस्त अंदाज़

Tuesday, December 1st, 2009

Helen Geeta

इन दिनों ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर जारी है गीता दत्त के गाए हुए गीतों की ख़ास लघु शृंखला ‘गीतांजली’, जिसके अन्तर्गत दस ऐसे गानें बजाए जा रहे हैं जो दस अलग अलग अभिनेत्रियों पर फ़िल्माए गए हैं। आज जिस अभिनेत्री को हमने चुना है वो नायिका के रूप में भले ही कुछ ही फ़िल्मों में नज़र आईं हों, लेकिन उन्हे सब से ज़्यादा ख्याति मिली खलनायिका के किरदारों के लिए। सही सोचा आपने, हम हेलेन की ही बात कर रहे हैं। वैसे हेलेन पर ज़्यादातर मशहूर गानें आशा भोसले ने गाए हैं, लेकिन ५० के दशक में गीता दत्त ने हेलेन के लिए बहुत से गानें गाए। आज हमने जिस गीत को चुना है वह है १९५७ की फ़िल्म ‘दुनिया रंग रंगीली’ से “किया यह क्या तूने इशारा जी अभी अभी, कि मेरा दिल तुझे पुकारा अरे अभी अभी”। राजेन्द्र कुमार, श्यामा, जॉनी वाकर, चाँद उस्मानी, जीवन व हेलेन अभिनीत इस फ़िल्म के गानें लिखे जान निसार अख़्तर ने और संगीत था ओ. पी. नय्यर साहब का। ‘आर पार’ की सफलता के बाद गीता दत्त को ही श्यामा के पार्श्वगायन के लिए चुना गया। इस फ़िल्म में श्यामा के नायक थे जॉनी वाकर और इस जोड़ी पर कई गानें भी फ़िल्माए गए जिनमें स्वर आशा भोसले का था। आशा जी ने इस फ़िल्म की मुख्य नायिका चाँद उस्मानी का भी पार्श्वगायन किया। ५० के दशक के शुरुआती सालों में नय्यर साहब गीता दत्त से बहुत सारे गानें गवाए थे, लेकिन जैसे जैसे यह दशक समापन की ओर बढ़ता गया, आशा भोसले बनती गईं नय्यर साहब की प्रधान गायिका। १९५८ की फ़िल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ में नय्यर साहब ने गीता जी से केवल दो गीत गवाए जो हेलेन पर फ़िल्माए गए। इनमें से एक था “मेरा नाम चिन चिन चू” जिसने गीता दत्त और हेलेन, दोनों को लोकप्रियता की बुलंदी पर बिठाया।

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जब बादल लहराया…झूम झूम के गाया…अभिनेत्री श्यामा के लिए गीता दत्त ने

Monday, November 30th, 2009

Shyama

जिस तरह से गीता दत्त और हेलेन की जोड़ी को अमरत्व प्रदान करने में बस एक सुपरहिट गीत “मेरा नाम चिन चिन चू” ही काफ़ी था, जिसकी धुन बनाई थी रीदम किंग् ओ. पी. नय्यर साहब ने, ठीक वैसे ही गीता जी के साथ अभिनेत्री श्यामा का नाम भी ‘आर पार’ के गीतों और एक और सदाबहार गीत “ऐ दिल मुझे बता दे” के साथ जुड़ा जा सकता है। जी हाँ, आज ‘गीतांजली’ में ज़िक्र गीता दत्त और श्यामा का। श्यामा ने अपना करीयर शुरु किया श्यामा ज़ुत्शी के नाम से जब कि उनका असली नाम था बेबी ख़ुर्शीद। ‘आर पार’ में अपार कामयाबी हासिल करने से पहले श्यामा को एक लम्बा संघर्ष करना पड़ा था। उन्होने अपना सफ़र १९४८ में फ़िल्म ‘जल्सा’ से शुरु किया था। वो बहुत सारी कामयाब फ़िल्मों में सह-अभिनेत्री के किरदारों में नज़र आईं जैसे कि ‘शायर’ में सुरैय्या के साथ, ‘शबनम’ में कामिनी कौशल के साथ, ‘नाच’ में फिर एक बार सुरैय्या के साथ, ‘जान पहचान’ में नरगिस के साथ और ‘तराना’ में मधुबाला के साथ। अनुमान लगाया जाता है कि गीता रॉय की आवाज़ में श्यामा पर फ़िल्माया हुआ पहला गीत १९४९ की फ़िल्म ‘दिल्लगी’ का होना चाहिए, जिसके बोल थे “तू मेरा चाँद मैं तेरी चांदनी”। अब आप यह कह उठेंगे कि यह तो सुरैय्या और श्याम ने गाया था! जी हाँ, लेकिन फ़िल्म में इस गीत का एक मिनट का एक वर्ज़न भी था जिसे गीता रॉय ने गाया था और जो श्यामा पर फ़िल्माया गया था। लेकिन बदक़िस्मती से यह वर्ज़न ग्रामोफ़ोन रिकार्ड पर जारी नहीं किया गया। इस तरह से गीता रॉय का गाया श्यामा पर फ़िल्माया हुआ पहले रिलीज़्ड गीत थे फ़िल्म ‘आसमान’ और ‘श्रीमतीजी’ में जो बनी थीं १९५२ में ओ. पी. नय्यर के संगीत निर्देशन में।

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धड़कने लगा दिल नज़र झुक गयी….नूतन की अदाकारी और गीता दत्त से स्वर, दुर्लभ संयोग

Friday, November 27th, 2009

Nutan

ल्ड इज़ गोल्ड’ पर इन दिनों आप सुन रहे हैं पार्श्वगायिका गीता दत्त के गाए हुए कुछ सुरीले सुमधुर गीत जो दस अलग अलग अभिनेत्रियों पर फ़िल्माए गए हैं। इन गीतों को चुनकर और इनके बारे में तमाम जानकारियाँ इकट्ठा कर हमें भेजा है गीता दत्त डोट कौम की टीम ने और उन्ही की कोशिश का यह नतीजा है कि गुज़रे ज़माने के ये अनमोल नग़में आप तक इस रूप में पहुँच रहे हैं।

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दर्शन प्यासी आई दासी…मधुबाला की विनती को स्वर दिए गीता दत्त ने

Thursday, November 26th, 2009

Madhubala

गीतांजली में आज बारी है हिंदी फ़िल्म जगत की सब से ख़ूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला पर फ़िल्माए गए गीता रॉय के गाए एक गीत की। गीत का ज़िक्र हम थोड़ी देर में करेंगे, पहले मधुबाला से जुड़ी कुछ बातें हो जाए! मधुबाला का असली नाम था मुमताज़ जहाँ बेग़म दहल्वी। उनका जन्म दिल्ली में एक रूढ़ी वादी पश्तून मुस्लिम परिवार में हुआ था। ११ बच्चों वाले परिवार की वो पाँचवीं औलाद थीं। अपने समकालीन नरगिस और मीना कुमारी की तरह वो भी हिंदी सिनेमा की एक बेहतरीन अभिनेत्री के रूप में जानी गईं। अपने नाम की तरह ही उन्होने चारों तरफ़ अपनी की शहद घोली जिसकी मिठास आज की पीढ़ी के लोग भी चखते हैं। मधुबाला की पहली फ़िल्म थी ‘बसंत’ जो बनी थी सन् ‘४२ में। इस फ़िल्म में उन्होने नायिका मुमताज़ शांति की बेटी का किरदार निभाया था। उन्हे पहला बड़ा ब्रेक मिला किदार शर्मा की फ़िल्म ‘नीलकमल’ में जिसमें उनके नायक थे राज कपूर, जिनकी भी बतौर नायक वह पहली फ़िल्म थी। ‘नीलकमल’ आई थी सन् ‘४७ में और इसी फ़िल्म से मुमताज़ बन गईं मधुबाला। उस समय उनकी आयु केवल १४ वर्ष ही थी। इसी फ़िल्म में गायिका गीता रॉय ने राजकुमारी और मुकेश के साथ साथ कई गीत गाए लेकिन इनमें से गीता जी का गाया हुआ कोई भी गीत मधुबाला के होठों पर नहीं सजे। अपने परिवार की आर्थिक अवस्था को बेहतर बनाने के लिए मधुबाला ने पहले ४ सालों में लगभग २४ फ़िल्मो में अभिनय किया था। यह सिलसिला जारी रहा और बाद में उन्हे इस बात का अफ़सोस भी रहा कि मजबूरी में उन्हे बहुत सारी ऐसी फ़िल्में भी करनी पड़ी जो उन्हे नहीं करनी चाहिए थी। क्वांटिटी की ख़ातिर उन्हे क्वालिटी के साथ समझौता करना पड़ा था। आज गीता रॉय की आवाज़ में मधुबाला पर फ़िल्माया हुआ जो गीत हम आप तक पहुँचा रहे हैं वह है फ़िल्म ‘संगदिल’ का गीत “दर्शन प्यासी आई दासी जगमग दीप जलाए”।

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आज की रात पिया दिल ना तोड़ो….अभिनेत्री कल्पना कार्तिक की पहली फिल्म में गाया था गीता दत्त ने इसे

Wednesday, November 25th, 2009

Kalpana Kartik

आज गीता जी की आवाज़ जिस अभिनेत्री पर सजने जा रही है वो हैं कल्पना कार्तिक। कल्पना कार्तिक का असली नाम था मोना सिंह, जो अपनी कॊलेज के दिनों में ‘मिस शिमला’ चुनी गईं थीं। अभिनेता देव आनंद से उनकी मुलाक़ात हुई और १९५४ में रूस में उन दोनों ने शादी कर ली। लेकिन ऐसा भी सुना जाता है कि उन दोनों की पहली मुलाक़ात फ़िल्म ‘बाज़ी’ के सेट पर हुई थी और ‘टैक्सी ड्राइवर’ के सेट पर शूटिंग् के दरमियान उन दोनों ने शादी की थी। लेकिन ऐसी कोई भी तस्वीर मौजूद नहीं है जो सच साबित कर सके। कल्पना कार्तिक ने अपनी फ़िल्मों में देव साहब के साथ ही काम किया। ५० के दशक में उनकी अभिनय से सजी कुल ५ फ़िल्में आईं। पहली फ़िल्म थी बाज़ी, जो बनी १९५१ में। बाक़ी चार फ़िल्मों के नाम हैं आंधियाँ (‘५२), टैक्सी ड्राइवर (‘५४), हाउस नंबर ४४ (‘५४), और नौ दो ग्यारह (‘५७)। दोस्तों, ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर आप ‘बाज़ी’, ‘टैक्सी ड्राइवर’ और ‘हाउस नंबर ४४’ के गीत सुन चुके हैं हाल ही में साहिर लुधियानवी व सचिन देव बर्मन पर केन्द्रित विशेष शृंखला के अंतर्गत। आज एक बार फिर से हम सुनेंगे फ़िल्म ‘बाज़ी’ से एक गीत। दरसल ‘बाज़ी’ में गीता जी के गाए एक से एक सुपरहिट गीत हैं जिनके बारे में हमने आपको साहिर-सचिनदा वाली शृंखला में ही बताया था। आज का गीत है “आज की रात पिया दिल ना तोड़ो, दिल की बात पिया मान लो”।

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सखी री मेरा मन नाचे. मीना कुमारी के अंदाज़ को मिला गीता दत्त की आवाज़ का साथ

Tuesday, November 24th, 2009

Meena Kumari

गीता दत्त के गाए गीतों की ख़ास शृंखला ‘गीतांजली’ की दूसरी कड़ी में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। इस शृंखला के तहत आप हमारे चुने गीता जी के गाए दस ऐसे गानें सुन रहे हैं इन दिनों जो दस अलग अलग अभिनेत्रियों पर फ़िल्माए गए हैं। कल पहली कड़ी में नरगिस पर फ़िल्माया हुआ ‘जोगन’ फ़िल्म से एक मीरा भजन आपने सुना, आज की अभिनेत्री हैं मीना कुमारी।

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ए री मैं तो प्रेम दीवानी….मीरा के रंग रंगी गीता दत्त की आवाज़

Tuesday, November 24th, 2009

Nargis

नवंबर १९३०। स्थान बंगाल का फ़रीदपुर, जो आज बंगलादेश का हिस्सा है। एक ज़मीनदार परिवार में जन्म हुआ था एक बच्ची का। १९४२ के आसपास वो परिवार साम्प्रदायिक दंगों से अपने आप को बचते बचाते आ पहुँची बम्बई नगरी। लाखों की सम्पत्ति और ज़मीन जायदाद को युंही छोड़कर बम्बई आ पहुँचे इस परिवार ने दो कमरे का एक मकान भाड़े पर लिया। गायन प्रतिभा होने की वजह से यह बच्ची हीरेन्द्रनाथ नंदी से संगीत की तालीम ले रही थी। दिन गुज़रते गए और यह बच्ची भी बड़ी होती गई। १६ वर्ष की आयु में एक रोज़ यह लड़की अपने घर पर रियाज़ कर रही थी जब उसके घर के नीचे से गुज़र रहे थे फ़िल्म संगीतकार पंडित हनुमान प्रसाद। उसकी गायन और आवाज़ से वो इतने प्रभावित हुए कि वो कौतुहल वश सीधे उसके घर में जा पहुँचे। पंडित हनुमान प्रसाद से उसकी यह मुलाक़ात उसकी क़िस्मत को हमेशा हमेशा के लिए बदलकर रख दी। पंडित प्रसाद ने फ़िल्म ‘भक्त प्रह्लाद’ में इस लड़की को पहला मौका दिया और इस तरह से फ़िल्म जगत को मिली एक लाजवाब पार्श्व गायिका के रूप में गीता रॉय, जो आगे चलकर गीता दत्त के नाम से मशहूर हुईं।

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